पटना । बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों की भागीदारी काफी कम है। पहले स्कूलों में भी इनकी संख्या अच्छी नहीं थी। लेकिन अब सरकारी प्रोत्साहन से बदलाव आया है।
आंकड़ों पर गौर करें तो छात्राओं के नामांकन का राष्ट्रीय औसत [सकल नामांकन अनुपात: जीईआर] जहां 7.7 है, वहीं बिहार में यह औसत 3.5 है। आर्थिक विपन्नता के साथ ही रूढि़वादी मानसिकता भी उच्च शिक्षा में बिहारी बालिकाओं की कम भागीदारी को जिम्मेदार है। वैसे कुछेक सालों में बिहार में परिवर्तन का चक्र जारी है।
हाल के दिनों में विकास यात्रा के क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह अपील की थी कि लड़कियों को स्कूल भेजा जाए। हाईस्कूलों तक लड़कियों को पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना की शुरुआत की गई। वर्ष 2007-08 में जहां 1.63 लाख लड़कियों को साइकिलें दी गईं, वहीं 2008-09 में 2.72 लाख लड़कियों को उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
गांव-शहर की गलियों में लड़कियों की साइकिल का पहिया ही नहीं घूम रहा है, बल्कि परिवर्तन का सकारात्मक असर दिख रहा है। स्कूलों में नामांकन से संबंधित असर 2009 की रिपोर्ट में बताया गया है कि नामांकन दर में गुणात्मक परिवर्तन हुआ है।
इसी क्रम में सरकार ने यह माना कि पोशाक की कमी भी एक वजह है, जिससे लड़कियां स्कूल नहीं जा पाती। किशोरवय की लड़कियों को स्कूलों की ओर से पोशाक भी दी जाने लगी।
मानव संसाधन विभाग की वार्षिक रिपोर्ट [2008-09] का जो आकलन है, उसमें बताया गया है कि लड़के-लड़कियों के संयुक्त नामांकन का अनुपात भी राष्ट्रीय औसत 9.20 की जगह बिहार में मात्र 6.70 है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि स्नातकोत्तर डिग्री में जहां लड़कों की संख्या कला पाठ्यक्रम में 14186 है, वहीं लड़कियों की यह संख्या मात्र एक हजार 272 है। एम काम में 778 और एमएससी में मात्र 948 लड़कियां दाखिला ले पायीं। स्नातक स्तर पर कला संकाय में करीब 31 हजार लड़कियों ने जबकि एक लाख 80 हजार छात्रों ने नामांकन लिया। स्नातक विज्ञान में लड़कियों का नामांकन 26 हजार जबकि लड़कों का 77 हजार से अधिक रहा।
अभियंत्रण या तकनीकी शिक्षा में लड़कियों की संख्या करीब नौ सौ पाई गईं, जबकि लड़कों की संख्या 5495 रहीं। चिकित्सा शिक्षा में यह स्थिति कुछ अच्छी है। लड़के का नामांकन करीब छह हजार हुआ, वहीं लड़कियों की संख्या तीन हजार 900 के करीब रही। उच्च शिक्षा में बिहारी छात्र-छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ही मानव संसाधन विभाग ने स्कूलों में संसाधन बढ़ाने के साथ ही मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार बिहार के सभी अनुमंडल मुख्यालय में डिग्री कालेज खोलने की पहल की है।
Thursday, June 11, 2009
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